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लाश का पोस्टमार्टम करते समय डॉक्टर भी कांपते है, दारू पीकर सुरक्षा की जाती है ?


पोस्टमार्टम एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें परिवार की सहमति से अपने परिवार के सदस्य की लाश को चीर-फाड़ कर, उसकी हत्या का पता लगाया जाता है, यह जानने के के लिए ऐसा क्या हुआ, जो उनकी मौत हो गई? पोस्टमार्टम ज्यादातर हत्या, आत्महत्या, रोड एक्सीडेंट, लावारिस लाश, गोली मारने के बाद लाश का किया जाता है।



जिस व्यक्ति की मौत हो जाती है, उसका पोस्टमार्टम परिवार की सहमति से किया जाता है, अगर परिवार की सहमति नहीं है, कि वह पोस्टमार्टम ना करें, तो पोस्टमार्टम नहीं किया जाता और अक्सर पुलिस पोस्टमार्टम करवाती है, ताकि अपराधी का पता चल सके, कि किसने, क्यों और कैसे हत्या करी।


पोस्टमार्टम के दौरान लाश की चीर-फाड़ कर, उनके कई हिस्से रख लिए जाते हैं, जैसे लिवर, किडनी, आंख इत्यादि, 50-55 वाले डॉक्टरों को पोस्टमार्टम करने की इजाजत नहीं होती और सरकारी डॉक्टर ही पोस्टमार्टम कर सकते हैं, डॉक्टर की डिग्री पाने के 5 साल बाद ही डॉक्टर को इजाजत होती है, कि वह किसी लाश का पोस्टमार्टम करें।


जिला अधिकारी की अनुमति के बिना पोस्टमार्टम नहीं किया जाता, डॉक्टर जिला अधिकारी से अनुमति लेकर ही पोस्टमार्टम करता है और सरकारी डॉक्टर के अलावा, साइंस के स्पेशलिस्ट डॉक्टर भी पोस्टमार्टम नहीं कर सकते, क्योंकि पोस्टमार्टम करते समय अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं।


अगर किसी की ज्यादा ही बदतर तरीके से हत्या कर दी गई है, तो पोस्टमार्टम करना अत्यधिक आवश्यक हो जाता है, क्योंकि अपराधी का पता लगाना बहुत ही आवश्यक है और उस को दंड देना सरकार का काम है, डॉक्टर भी पोस्टमार्टम करने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें कोर्ट में जाकर सच्चाई बोलनी पड़ती है, जिसकी वजह से उन पर भी जान का खतरा बन जाता है।


कई परिवार पोस्टमार्टम इसलिए नहीं कराते, क्योंकि पोस्टमार्टम में पूरे शरीर की चिर-फाड़ कर दी जाती है और खून धड़ाधड़ बहता रहता है, इसकी वजह से लाश को जलाना और घर ले जाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है, उसका क्रिया-कर्म परिवार वालो के बस की बात नही होती, कई पोस्टमार्टम लैब्स में तो बर्फ की ठंडी सिल्ली भी नहीं होती, जिससे खून जम जाए।


पोस्टमार्टम रात के समय किया जाता है, ताकि इंसान का हर पार्ट रोशनी में दिख जाए और पोस्टमार्टम करते समय डॉक्टरों को भी काफी डर लगता है, क्योंकि कई बार डरावनी घटनाएं हो जाती हैं, पोस्टमार्टम करते समय सरकारी डॉक्टर भी कांप  जाते हैं और उनके साथ वाले भी डरे हुए रहते हैं।


पोस्टमार्टम लैब्स की चौकीदारी करते समय चौकीदार को भी दारू पीकर चौकीदारी करनी पड़ती है, क्योंकि रात को मृत लाशों की चीखें सुनाई देती हैं, जिसकी वजह से सब कांप जाते हैं, चौकीदारों को भी सरकार ही दारू प्रदान करवाती है, ताकि उनको हार्ट अटैक ना आ जाए।
लाश का पोस्टमार्टम करते समय डॉक्टर भी कांपते है, दारू पीकर सुरक्षा की जाती है ? Reviewed by Chiraj on 11:30 am Rating: 5

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